छत्तीसगढ़ राज्य में बस किराए में बढ़ोतरी की लंबे समय से चली आ रही माँग पर अब शासन स्तर पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। हाल ही में राजधानी रायपुर में परिवहन मंत्री केदार कश्यप के साथ बस ओनर फेडरेशन के पदाधिकारियों और प्रदेशभर से आए बस संचालकों की एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बस संचालकों की ओर से साधारण बसों का किराया 75 प्रतिशत तक और डीलक्स बसों का किराया 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का आधिकारिक प्रस्ताव रखा गया है।
किराए के मामलों का जल्द होगा समाधान
बैठक के दौरान परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बस संचालकों की इन सभी मांगों को गंभीरता से सुना और किराए से जुड़े इस पूरे मामले का जल्द से जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, मंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया और औपचारिकताओं को समय-सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इस बैठक में केवल किराए पर ही नहीं, बल्कि स्लीपर बसों के टैक्स, बसों के संचालन की टाइमिंग, ऑनलाइन परमिट, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, फिटनेस सर्टिफिकेट और महिला यात्रियों की सुरक्षा जैसे कई अन्य गंभीर मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
स्लीपर बसों के टैक्स नियमों में बदलाव की मांग
बस संचालकों ने अपनी प्रमुख माँग रखते हुए कहा कि वर्तमान में स्लीपर बसों में एक स्लीपर बर्थ के बदले दो सीटों के बराबर टैक्स वसूल किया जा रहा है, जिसे पूरी तरह से बदला जाना चाहिए। फेडरेशन की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है कि एक स्लीपर बर्थ पर केवल एक सीट के बराबर ही कर (टैक्स) लिया जाना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए परिवहन मंत्री ने अधिकारियों को इस मामले से जुड़े सभी तकनीकी, व्यावहारिक और वित्तीय पहलुओं की बारीकी से जाँच करने के निर्देश दिए हैं।
बसों की टाइमिंग और यातायात व्यवस्था में सुधार
स्टेज कैरिज बसों की समय-सारिणी (टाइमिंग) को व्यवस्थित करने को लेकर भी बैठक में व्यापक मंथन किया गया। बस संचालकों ने सुझाव दिया कि मुख्य मार्गों पर चलने वाली बसों के बीच कम से कम 10 मिनट का और ग्रामीण क्षेत्रों के मार्गों पर चलने वाली बसों के बीच 30 मिनट का उचित अंतर रखा जाना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से एक ही रूट पर चलने वाली बसों के बीच होने वाली अनावश्यक प्रतिस्पर्धा पर लगाम लगेगी और बस संचालन अधिक सुचारू व अनुशासित हो सकेगा।
परिवहन सेवाओं का डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन परमिट
बैठक में परमिट सहित परिवहन विभाग की अन्य सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। विभाग की ओर से अवगत कराया गया कि वर्तमान में स्टेज कैरिज बसों के लिए ऑनलाइन परमिट जारी करने की सुविधा पहले से ही दी जा रही है। इस पर आगे निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि परमिट के अलावा परिवहन विभाग से जुड़ी अन्य सेवाओं को भी अधिक से अधिक संख्या में ऑनलाइन किया जाए, ताकि बस संचालकों और आम नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
महिला सुरक्षा और ट्रैकिंग सिस्टम पर विशेष जोर
महिला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परिवहन मंत्री ने बसों की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली को और अधिक प्रभावी व मजबूत बनाने के निर्देश दिए। बैठक में यह तय किया गया कि यदि बस में कोई महिला अकेली यात्री सफर कर रही है, तो उस वाहन की लाइव ऑनलाइन ट्रैकिंग की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा, बसों में पहले से लगे सुरक्षा कैमरों और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस को हर समय पूरी तरह चालू रखने तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग करने पर भी विशेष रूप से जोर दिया गया।
अधिसूचना निरस्त करने की मांग और आगामी कार्रवाई
फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग के साथ-साथ गत 11 मार्च 2025 को जारी की गई संशोधित अधिसूचना को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की पुरजोर मांग की है। परिवहन मंत्री ने किराए और अधिसूचना से जुड़े इन सभी पहलुओं पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है। इस बैठक में बस ओनर फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुँचे बस संचालक और परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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