छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक अत्यंत झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां अदालत ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक जघन्य अपराध में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दुर्ग में 6 साल की अपनी ही सगे भतीजी के साथ दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करने के मामले में दोषी पाए गए 24 वर्षीय चाचा को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। इस त्वरित और न्यायसंगत फैसले ने पीड़ित परिवार को एक बड़ी राहत दी है, हालांकि इस घटना ने पूरे समाज को अंदर से झकझोर कर रख दिया है।
कन्या पूजन के दिन हुई थीवानियत यह खौफनाक वारदात करीब डेढ़ साल पहले 6 अप्रैल 2025 की है। उस दिन सुबह करीब 8 बजे बच्ची अपनी बुआ-दादी के घर कन्या पूजन की तैयारी के दौरान पहुंची थी। घर की महिलाएं मंदिर और रसोई के कामों में व्यस्त थीं, इसी दौरान 24 साल के आरोपी चाचा ने मासूम को बहला-फुसलाकर मकान की छत पर बने एक अधूरे कमरे में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ शारीरिक उत्पीड़न किया, उसकी चीख दबाने के लिए गला घोंटा और उसके शरीर को सिगरेट से भी दागा।
नाटक और गिरफ्तारी का सिलसिला वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने ऐसा नाटक रचा कि किसी को उस पर शक न हो। वह करीब 3 घंटे तक परिजनों और पुलिस के साथ मिलकर बच्ची को ढूंढने का नाटक करता रहा। उसने बच्ची के अचेत शरीर को पड़ोसी की पुरानी कार की पिछली सीट के नीचे छिपा दिया था, क्योंकि उसे पता था कि उस कार का एक दरवाजा लॉक नहीं रहता था। जब पुलिस को शक हुआ और कार की तलाशी ली गई, तो बच्ची वहां मिली। उस वक्त उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया क्योंकि बंद कार के अंदर गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण उसकी स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी।
एसआईटी की मजबूत जांच और फैसला शुरुआती दौर में परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। पुलिस ने साइंटिफिक जांच, डीएनए रिपोर्ट और पुख्ता गवाहों के आधार पर अपनी कड़ी कार्रवाई आगे बढ़ाई। पुलिस की इस बेहतरीन और पेशेवर तफ्तीश का ही परिणाम रहा कि महज 17 महीने के भीतर अदालत ने दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए इस जघन्य अपराध के दोषी चाचा को फांसी के फंदे पर लटकाने का ऐतिहासिक फैसला सुना दिया।
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