मां बम्लेश्वरी मंदिर में पूजा परंपराओं पर विवाद, राजपरिवार ने उठाई प्रतिनिधित्व की मांग
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि की पंचमी भेंट के दौरान विवाद ने तूल पकड़ लिया है। खैरागढ़ राजपरिवार और मंदिर ट्रस्ट के बीच पूजा की परंपराओं और व्यवस्था में राजपरिवार की भूमिका को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।
- राजपरिवार के सदस्य भवानी बहादुर सिंह ने ट्रस्ट में विभिन्न समाजों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।
- ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल का कहना है कि मंदिर जनता का है और यहां वैदिक तथा बैगा दोनों पद्धतियों से पूजा होती है।
- गोंडवाना महासभा के संचालक रमेश उइके ने पारंपरिक पंचमी भेंट की परंपरा की बात की, जो पूर्वजों के समय से चली आ रही है।
- गर्भगृह में प्रवेश को लेकर विवाद हुआ था, जिसके चलते ट्रस्ट ने डोंगरगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई।
- राजपरिवार का आरोप है कि उनकी पूजा संबंधी भूमिका को सीमित कर दिया गया है।
प्रतिनिधित्व की मांग: भवानी बहादुर सिंह का कहना है कि मंदिर में विभिन्न समाजों के लोगों को स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि सभी की परंपराओं का सम्मान हो सके। उनका आरोप है कि ट्रस्ट में कुछ सदस्यों को 5-5 वोट देने का अधिकार है, जो अनुचित है।
ट्रस्ट का पक्ष है कि मंदिर की व्यवस्था पहले राजपरिवार के हाथों में थी, लेकिन 1975 में ट्रस्ट के पंजीयन के बाद से यह व्यवस्था बदली गई। ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल का कहना है कि मंदिर किसी एक परिवार की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह जनता का है।
मंदिर से जुड़े विवाद ने पूजा पद्धति, राजपरिवार की भूमिका और ट्रस्ट में समाजों की भागीदारी जैसे सवालों को जन्म दिया है। इस संदर्भ में, भवानी बहादुर सिंह की मांग है कि ट्रस्ट में सभी समाजों को प्रतिनिधित्व मिले और अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी बारी-बारी से दी जाए।
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