केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सेक्टर 36A स्थित प्रतिष्ठित मेहर चंद महाजन डीएवी कॉलेज फॉर वूमन (एमसीएम कॉलेज) के बाहर और प्रसिद्ध 'गेड़ी रूट' पर छुट्टी के समय होने वाली गुंडागर्दी, हुड़दंग और अव्यवस्था पर पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग (PSHRC) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास लगातार बढ़ रही इस तरह की असामाजिक गतिविधियों और सुरक्षा में लापारवाही को लेकर आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से इस पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

मानवाधिकार आयोग का स्वतः संज्ञान और आदेश

पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संत प्रकाश और आयोग के सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह के नेतृत्व में इस पूरे मामले पर संज्ञान लिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के सार्वजनिक स्थल छात्राओं और महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित, भयमुक्त और व्यवस्थित होने चाहिए। ट्रैफिक जाम, छेड़छाड़, फब्तियां कसने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आयोग ने चंडीगढ़ के एसएसपी को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई की तय तारीख से ठीक एक सप्ताह पहले इस मामले से जुड़ी सभी बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश की जाए।

स्थानीय निवासी की शिकायत और गंभीर आरोप

यह पूरा मामला तब सामने आया जब सेक्टर 36A के निवासी कुलबीर सिंह राणा ने पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग को एक औपचारिक शिकायत सौंपी। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि कॉलेज की छुट्टी के समय रोजाना मनचलों और अज्ञात युवकों का जमावड़ा लग जाता है। ये युवक अपनी गाड़ियां बेहद लापरवाही, तेज गति और खतरनाक तरीके से चलाते हैं, जिससे न केवल यातायात पूरी तरह बाधित होता है, बल्कि राहगीरों की जान को भी खतरा बना रहता है।

शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

  • छात्राओं से छेड़छाड़: युवकों के समूह कॉलेज के बाहर जानबूझकर जमा होते हैं और आने-जाने वाली छात्राओं पर फब्तियां कसते हैं, तंज कसते हैं और खुलेआम ईव-टीजिंग (छेड़छाड़) जैसी हरकतों को अंजाम देते हैं।

  • अनाधिकृत वीडियो बनाना: असामाजिक तत्वों द्वारा कॉलेज की छात्राओं की बिना अनुमति के वीडियो बनाई जाती हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत गोपनीयता और सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

  • लगातार शोर-शराबा: यह हुड़दंग, तेज संगीत और गाड़ियों का शोर-शराबा देर रात तक जारी रहता है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों और विशेषकर बुजुर्गों तथा बच्चों का जीना दुश्वार हो गया है।

6 अगस्त को कॉलेज गेट पर हुई थी खूनी झड़प

शिकायतकर्ता ने आयोग का ध्यान आकर्षित करने के लिए 6 अगस्त 2026 की एक विशेष घटना का हवाला भी दिया। उन्होंने बताया कि उस दिन दोपहर को करीब 2:35 बजे कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर दो विरोधी गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। स्थिति इतनी हिंसक हो गई थी कि मामले को शांत कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर तुरंत पीसीआर (PCR) वैन बुलानी पड़ी थी। इस तरह की घटनाएं यह साबित करती हैं कि कॉलेज के आसपास का इलाका अपराधियों और हुड़दंगियों के लिए सेफ जोन बनता जा रहा है।

स्थानीय निवासियों और छात्राओं की प्रमुख मांगें

इस लगातार बढ़ती अराजकता से परेशान होकर स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन के सामने कुछ सख्त और व्यावहारिक मांगें रखी हैं, ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके:

  • पुलिस बीट बॉक्स की स्थापना: स्थानीय लोगों की मांग है कि वेरका बूथ के पास एक स्थायी पुलिस बीट ऑफिस स्थापित किया जाए, जिससे पुलिस की मौजूदगी हमेशा बनी रहे।

  • नियमित गश्त और नाकेबंदी: क्षेत्र में पुलिस की नियमित गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गाड़ियों की सघन जांच के लिए विभिन्न चौराहों पर चेकिंग प्वाइंट्स (नाके) लगाए जाएं।

  • ट्रैफिक नियंत्रण और सख्त कार्रवाई: धीमी, खतरनाक और लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले तथा स्टंट करने वाले हुड़दंगियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

बहरहाल, मानवाधिकार आयोग की इस सख्ती के बाद अब चंडीगढ़ पुलिस प्रशासन पर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने का भारी दबाव बन गया है। उम्मीद की जा रही है कि पुलिस इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कॉलेज के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करेगी।