इंदौर के चोरल जंगल में रेलवे ट्रैक के लिए प्रस्तावित 2.5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोकजे और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिविजन बेंच ने वन विभाग और रेलवे को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

  • चोरल के जंगल इंदौर और मालवा क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो निमाड़ की गर्म हवाओं को रोकने में मदद करते हैं।
  • याचिकाकर्ता का दावा है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से तापमान बढ़ेगा, भूजल स्तर गिरेगा और बारिश पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
  • रेलवे ट्रैक के बदले गए डिजाइन के कारण पहले से अधिक पेड़ों की कटाई की आवश्यकता बताई गई है।
  • चोरल जंगल में बाघों और तेंदुओं सहित अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है, जिस पर खतरा मंडरा रहा है।
  • 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के दुर्लभ होने का दावा किया गया है, जिसमें सलाई जैसे पेड़ों की संख्या में गिरावट शामिल है।

महत्वपूर्ण: वन विभाग और रेलवे को 30 नवंबर से पहले जवाब दाखिल करना होगा।

हाईकोर्ट ने यह रोक जबलपुर खंडपीठ के पुराने आदेशों के आधार पर लगाई है, जिसमें वन्यजीवी सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की है, जो इंदौर और मालवा क्षेत्र में वन भूमि के डायवर्जन और पेड़ों की कटाई से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा करेगी। फिलहाल कोर्ट के आदेश से पेड़ कटाई पर रोक लगी है, और रेलवे व वन विभाग के जवाब के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।