इंदौर में लकवे के बाद स्पास्टिसिटी के लिए मुफ्त बोटोक्स उपचार

इंदौर के एमवाय अस्पताल में लकवे या स्ट्रोक के बाद मांसपेशियों में होने वाली स्पास्टिसिटी का इलाज बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) से नि:शुल्क किया जा रहा है। यह सुविधा आयुष्मान योजना के अंतर्गत दी जा रही है और अब तक 1000 से अधिक मरीज इसका लाभ उठा चुके हैं।

  • बोटोक्स लकवे का इलाज नहीं है बल्कि स्पास्टिसिटी को कम करने के लिए उपयोगी है।
  • स्ट्रोक के बाद कुछ मरीजों की मांसपेशियां असामान्य रूप से सख्त हो जाती हैं, जिससे हाथ-पैर की हरकत में दिक्कत होती है।
  • डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल मरीज की मांसपेशियों का आकलन कर, जरूरी क्षेत्रों में बोटोक्स इंजेक्शन लगाती हैं।
  • बोटोक्स का असर 3 से 6 महीने तक रहता है, जिसके बाद पुनः उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
  • एमवाय अस्पताल में यह उपचार पिछले 10 वर्षों से दिया जा रहा है, जिससे कई गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है।

महत्वपूर्ण निर्देश: बोटोक्स के बारे में किसी भी भ्रामक जानकारी में न आएं। स्वयं से बिना डॉक्टर की सलाह के इंजेक्शन न लगवाएं।

एमवाय अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बोटोक्स के बाद उन्हें हाथ-पैर की हरकत में सुधार महसूस हुआ है। एक मरीज ने कहा कि यदि उन्हें पहले इसकी जानकारी होती तो अन्य जगहों पर इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ता।

डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि बोटोक्स थेरेपी निशुल्क होने से गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ कम होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बोटोक्स का प्रभाव अस्थायी होता है और यह स्पास्टिसिटी के इलाज में सहायक है, लेकिन यह लकवे का पूर्ण इलाज नहीं है।