जबलपुर में रक्षा क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में 472 करोड़ रुपये की लागत से T-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना का भूमिपूजन किया। इस पहल के माध्यम से भारतीय सेना के T-72 टैंकों के ओवरहॉल, मरम्मत और तकनीकी उन्नयन के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होगा।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह परियोजना भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और रक्षा उत्पादन की क्षमता को दर्शाती है।
- उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य रक्षा निवेश का प्रमुख केंद्र बन रहा है।
- जबलपुर की यह परियोजना भारतीय सेना के टैंकों के रखरखाव की जरूरतों को पूरा करेगी।
- पहले चरण में हर साल 12 T-72 टैंकों का पूर्ण ओवरहॉल और अपग्रेड किया जाएगा।
- T-72 टैंक भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंकों में से एक है, जिसमें 125 मिमी स्मूथबोर गन और ऑटो-लोडर सिस्टम है।
महत्वपूर्ण: रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व को दोहराते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस टैंकों की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है।
रक्षा मंत्री ने देश के रक्षा उत्पादन में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया। 2014 में 46 हजार करोड़ रुपये से शुरू होकर यह उत्पादन अब 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा निर्यात भी 39 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार ने 2028-29 तक इसे 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक करने का लक्ष्य रखा है।
जबलपुर में T-72 ओवरहॉल परियोजना से स्थानीय उद्योगों और तकनीकी मानव संसाधन के लिए नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। यह पहल जबलपुर को रक्षा उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।
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