उज्जैन में सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, तीन दुर्लभ योग बने

उज्जैन में सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस वर्ष यह अमावस्या विशेष है क्योंकि 82 साल में 13वीं बार तीन दुर्लभ योग—गजछाया योग, शनिश्चरी अमावस्या और कन्या राशि में सूर्य-चंद्रमा का संयोग—एक साथ बन रहे हैं। भक्तों ने शिप्रा और नर्मदा नदी में स्नान और तर्पण कर अपने पितरों को श्रद्धांजलि दी।

  • श्रद्धालुओं ने उज्जैन के सिद्धवट घाट पर पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध किया।
  • त्रिवेणी शनि मंदिर में शनिश्चरी अमावस्या के चलते रात 12 बजे से ही भक्तों की कतारें लग गईं।
  • केडी पैलेस पर श्रद्धालुओं ने नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए स्नान किया।
  • घाटों पर छोड़े गए जूते-चप्पलों और कपड़ों को पुनः उपयोग के लिए एकत्र किया जाएगा।
  • शनिश्चरी अमावस्या पर चढ़ाए गए तेल की नीलामी की जाएगी, जिससे प्राप्त राशि प्रकल्पों में उपयोग होगी।

महत्वपूर्ण निर्देश: घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं को निर्देशित किया गया है कि वे घाटों पर साफ-सफाई का ध्यान रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

उज्जैन में इस धार्मिक अवसर पर पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और पितृ कर्मों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस संयोग में किए गए कर्मों का विशेष फल मिलता है।