उज्जैन में श्राद्ध पक्ष: 60 साल बाद बन रहा विशेष ग्रह संयोग

उज्जैन में इस बार का श्राद्ध पक्ष विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। 26 सितंबर से शुरू हो रहे इस श्राद्ध पक्ष के दौरान सिद्धवट, रामघाट और शिप्रा नदी के अन्य घाटों पर देशभर से श्रद्धालु पहुंचेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करीब 60 साल बाद एक विशेष ग्रह संयोग बन रहा है, जिससे इस श्राद्ध पक्ष की महत्ता और बढ़ गई है।

  • श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को समाप्त होगा।
  • ग्रह संयोग में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि की विशेष स्थिति बन रही है।
  • सिद्धवट पर पितरों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध किया जाता है।
  • श्रद्धालु शिप्रा नदी के घाटों पर पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं।
  • सिद्धवट का धार्मिक महत्व प्रयागराज के अक्षयवट और गया के बोधिवट के समकक्ष है।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण निर्देश:

श्रद्धालुओं को घाटों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिप्रा नदी के जल की स्थिति पर प्रशासन की नजर है, अतः नदी में स्नान करते समय सावधानी बरतें।

सिद्धवट मंदिर के पुजारी राघवेंद्र चतुर्वेदी के अनुसार, सिद्धवट का वटवृक्ष भगवान शिव के स्वरूप में पूजा जाता है। यहां परंपरा के अनुसार, पितरों के नाम लेकर वटवृक्ष पर कच्चा दूध चढ़ाने से पितरों की शांति और सद्गति की कामना की जाती है।

उज्जैन का सिद्धवट धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यहां पितरों के तर्पण और श्राद्ध करने से आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति की मान्यता है। श्रद्धालुओं को उचित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए श्राद्ध पक्ष के अनुष्ठानों में भाग लेना चाहिए।