बदलती जीवनशैली से आईसीयू में पहुंचने वाले मरीजों की उम्र घट रही है
आधुनिक जीवनशैली और तनावपूर्ण दिनचर्या के चलते युवा और बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। भोपाल में आयोजित एमपी क्रिटिकॉन 1.0 में विशेषज्ञों ने बताया कि आईसीयू में पहुंचने वाले मरीजों की उम्र में कमी आ रही है। इस बदलाव के पीछे लंबे स्क्रीन टाइम, नींद की कमी और पेशेवर तनाव जैसे कारक जिम्मेदार हैं।
- 8 साल के अमित को लगातार सिरदर्द और नींद की कमी की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
- 20 से 40 वर्ष के युवाओं में स्ट्रेस, अनिद्रा और स्क्रीन टाइम की समस्याएं बढ़ रही हैं।
- पेशेवर तनाव के चलते कुछ मामलों में आत्महत्या की कोशिशें भी सामने आई हैं।
- बुजुर्गों में कई पुरानी बीमारियों के चलते आईसीयू की आवश्यकता बढ़ी है।
- डॉक्टरों ने लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल के इस्तेमाल के बीच ब्रेक लेने और एक्सरसाइज करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों की राय और सावधानियां:
डॉ. आनंद सांघी के अनुसार, पेशेवर तनाव अब सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं है। घर की जिम्मेदारियों और काम के टारगेट के कारण तनाव बढ़ रहा है। इस तनाव को कम करने के लिए नियमित ब्रेक लेना और तनाव प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करना आवश्यक है। बच्चों और छात्रों में धैर्य की कमी और तनाव के मामलों में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण है।
डॉ. संजय धानुका ने बताया कि बुजुर्ग मरीजों की संख्या में वृद्धि का कारण जीवन प्रत्याशा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार है। लंबे समय तक बीमारियों के साथ जी रहे मरीजों की संख्या भी बढ़ी है, जिससे आईसीयू की आवश्यकता बढ़ सकती है।
समाज में बढ़ते तनाव और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के बीच, यह आवश्यक है कि हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और समय-समय पर चिकित्सा परामर्श लें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और तनाव प्रबंधन तकनीकों का प्रयोग करके हम अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं।
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