छत्तीसगढ़ के गठन के शुरुआती दिनों में धान खरीदी प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन गया था। यह कहानी है कैसे धान खरीदी की शुरुआत हुई, कैसे यह किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का माध्यम बनी और कैसे यह मुद्दा राजनीतिक वादों का केंद्र बन गया।
- छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई। अजीत जोगी पहले मुख्यमंत्री बने।
- धान खरीदी की शुरुआत में किसानों को मंडियों में लंबा इंतजार करना पड़ता था।
- प्रदेश सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी की नीति तय की।
- भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने चावल लेने से इनकार किया तो अजीत जोगी मंत्रिमंडल ने दिल्ली जाकर धरना दिया।
- राज्य में अकाल जैसे हालात बनने पर काम के बदले धान देने की योजना शुरू की गई।
- बोनस की राजनीति रमन सिंह सरकार के दौरान शुरू हुई, जो आगे चुनावी वादों का हिस्सा बन गई।
- भूपेश बघेल सरकार ने धान के लिए 2500 रुपए प्रति क्विंटल का वादा पूरा किया।
धान खरीदी के मुद्दे पर राज्य और केंद्र सरकार के बीच खींचतान चलती रही है।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी हमेशा से ही किसानों के आर्थिक विकास और राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। समय के साथ-साथ यह मुद्दा विभिन्न सरकारों के लिए चुनावी वादों का केंद्र बन गया। वर्तमान में धान खरीदी की प्रक्रिया और इसके तहत मिलने वाली सहायता ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है।
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