इस वर्ष धनतेरस का पर्व दो दिन, 6 और 7 नवंबर को मनाया जाएगा। इस त्योहार पर विशेष पूजा और खरीदारी की जाती है, और हर दिन डेढ़ घंटे के चार-चार मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं।
- धनतेरस पर धनिया और झाड़ू खरीदने की परंपरा का विशेष महत्व है।
- पद्म पुराण और स्कंद पुराण में लक्ष्मी को अन्न और धान्य को बढ़ाने वाली देवी कहा गया है, इसलिए धनिया को आमदनी में बढ़ोतरी का प्रतीक माना जाता है।
- झाड़ू को घर की दरिद्रता और नकारात्मकता को बाहर निकालने का प्रतीक माना गया है।
- श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, जो समृद्धि की प्रतीक हैं।
- करीब 200 साल पहले से धनतेरस पर सिक्कों की पूजा करने की परंपरा रही है, जिसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता था।
ध्यान दें: धनतेरस पर खरीदारी करते समय इन परंपराओं का पालन करना शुभ माना जाता है।
धनतेरस का पर्व समृद्धि और संपन्नता की कामना के साथ मनाया जाता है। इसलिए इस दिन की गई खरीदारी को शुभ माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सही मुहूर्त में की गई पूजा और खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि आती है।
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