छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद शातिर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दुर्ग जिले के पाटन इलाके में एक अंतरराज्यीय ठग गिरोह ने ज्वेलर्स (सराफा व्यापारियों) को अपना निशाना बनाते हुए करीब 19 लाख 32 हजार रुपए की बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दिया। शातिर बदमाशों ने असली सोने की आड़ में नकली सोने की पत्तियां गिरवी रखकर इस पूरी ठगी को अंजाम दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्थान के अलवर जिले से ताल्लुक रखने वाले गिरोह के कुल छह सदस्यों को धर दबोचा है। पुलिस की इस मुस्तैदी से एक अन्य बड़ी ठगी की वारदात होने से भी बच गई।
ठगी का शातिर तरीका और वारदात का खुलासा
पुलिस से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह अंतरराज्यीय गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। आरोपी शुरुआत में अलग-अलग इलाकों में घूमकर और मुख्य रूप से चटाई बेचने के बहाने छोटे कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचते थे। इसी आड़ में वे स्थानीय ज्वेलर्स से संपर्क बनाते थे और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतते थे।
अपने ऊपर विश्वास कायम करने के लिए गिरोह का कोई सदस्य पहले किसी स्थानीय ज्वेलर्स के पास असली सोने की अंगूठी या अन्य छोटा आभूषण गिरवी रखता था। तय समय पर वह आरोपी आकर पैसे चुका देता था और अपना असली आभूषण वापस ले जाता था। इस चालाकी के कारण स्थानीय व्यापारियों के मन से शक पूरी तरह निकल जाता था और वे आरोपियों पर आँख मूंदकर भरोसा करने लगते थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर इस गिरोह ने दुर्ग जिले के पाटन को अपना अगला निशाना बनाया।
पाटन के लक्ष्मी ज्वेलर्स में करोड़ों की ठगी
घटना 24 सितंबर की है, जब पाटन के पुराना बाजार स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मी ज्वेलर्स में इस गिरोह के सदस्य पहुँचे। आरोपियों ने दुकान के व्यापारी को झांसे में लेते हुए करीब 18 सोने की पत्तियां असली बताकर गिरवी रखीं, जिनका कुल वजन लगभग 180 ग्राम था। इन पत्तियों को असली मानकर व्यापारी ने गिरोह को इसके एवज में 15 लाख 93 हजार रुपए नकद दे दिए। इसके अलावा, शातिर ठग दुकान से करीब 3 लाख 39 हजार रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण भी उधारी के रूप में अपने साथ ले गए।
आरोपियों ने एक सप्ताह के भीतर ब्याज सहित पूरी रकम लौटाने का वादा किया था। लेकिन जब तय समय बीत जाने के बाद भी आरोपी पैसे लेकर नहीं लौटे और उनका कोई पता नहीं चला, तब ज्वेलर्स व्यापारी को गंभीर संदेह हुआ। व्यापारी ने तुरंत उन सोने की पत्तियों की गहन जांच कराई, तो सच्चाई सामने आते ही उनके होश उड़ गए। जांच में पता चला कि गिरवी रखी गई उन 18 पत्तियों में केवल 10 प्रतिशत ही असली सोना था, जबकि शेष 90 प्रतिशत हिस्सा किसी अन्य धातु का था। ठगी का अहसास होते ही व्यापारी ने तुरंत पाटन थाने पहुँचकर इस बात की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
बालोद और राजनांदगांव तक फैला था जाल, ट्रेन से भागने की कोशिश
पाटन में ठगी की घटना को अंजाम देने के बाद यह गिरोह अन्य जिलों के व्यापारियों को ठगने की फिराक में था। इसी दौरान दुर्ग पुलिस को बालोद जिले के अर्जुन्दा क्षेत्र से एक अहम सूचना मिली। पुलिस को पता चला कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति इसी समान तरीके से एक अन्य ज्वेलर्स के यहाँ नकली सोना गिरवी रखकर करीब 25 लाख रुपए ठगने की कोशिश कर रहे हैं। बिना देर किए पुलिस टीम ने अर्जुन्दा में तुरंत दबिश दी और संदिग्धों को पकड़ लिया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने राजनांदगांव शहर में एक किराए के मकान में अपने अन्य साथियों के ठहरने की जानकारी दी। दुर्ग पुलिस की टीम तुरंत राजनांदगांव पहुँची, लेकिन तब तक कुछ आरोपी वहाँ से फरार हो चुके थे। पुलिस ने अत्याधुनिक तकनीकी सुरागों और सीसीटीवी फुटेज की मदद से उनकी तलाश शुरू कर दी। जब यह पता चला कि बचे हुए आरोपी ट्रेन के जरिए भागने की कोशिश कर रहे हैं, तो दुर्ग पुलिस ने तुरंत नागपुर आरपीएफ से संपर्क किया। आरपीएफ की संयुक्त मदद से चलती ट्रेन में कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं और दो पुरुषों को धर दबोचा गया। इस तरह पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गिरोह के कुल छह सदस्यों को कानून के शिकंजे में ले लिया।
भारी मात्रा में नकली सोना और अन्य सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से ठगी से जुड़े कई अहम और चौकाने वाले सामान बरामद किए हैं। इनमें 23 नकली सोने की पत्तियां और 1 असली सोने की पत्ती शामिल है, जिनका कुल वजन लगभग 240 ग्राम है। इसके अलावा आरोपियों के पास से 16,190 रुपए नकद, एक मोटरसाइकिल, छह विशेष गुप्त कपड़े की थैलियां, ज्वेलर्स दुकान का कोरा बिल, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, हथौड़ी, पेचकस, स्क्रूड्राइवर और वाहन बिक्री पत्र भी जब्त किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कमर में बांधने वाली छह गुप्त कपड़े की थैलियों का इस्तेमाल करते थे। इन विशेष थैलियों में वे नकदी, नकली सोने की पत्तियां और अन्य उपकरण छिपाकर रखते थे, ताकि आसानी से पुलिस की नजरों से बच सकें और एक जगह से दूसरी जगह आ-जा सकें।
पुलिस की सतर्कता और व्यापारियों के लिए एडवाइजरी
इस सनसनीखेज मामले के खुलासे के बाद दुर्ग पुलिस ने दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव और रायपुर के ग्रामीण तथा कस्बाई क्षेत्रों के सभी ज्वेलर्स और ज्वेलर्स एसोसिएशन से तुरंत संपर्क किया। पुलिस ने व्यापारियों को इस अंतरराज्यीय गिरोह के ठगी करने के नए तौर-तरीकों की जानकारी दी और सभी को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी।
फिलहाल पुलिस आरोपियों की दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव, अर्जुन्दा और गुंडरदेही समेत आसपास के तमाम इलाकों में आवाजाही और आपराधिक इतिहास की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक छत्तीसगढ़ के किन-किन जिलों और कितने अन्य ज्वेलर्स को इसी तरीके से अपना शिकार बनाया है या फिर ठगी की कोशिश की है। इस कार्रवाई से स्थानीय व्यापारियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
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