छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में लगभग दो महीने पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को पुलिस ने आधुनिक तकनीक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरी तरह से सुलझा लिया है। यह पूरा मामला जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोसा गांव का है। पुलिस ने इस अंधे कत्ल के मामले में मृतक की शादीशुदा प्रेमिका और उसके दो भाइयों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। आइए जानते हैं इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी सिलसिलेवार कहानी।

मृत युवक और प्रेम प्रसंग की पृष्ठभूमि

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक अमित भंडारी (उम्र 25 वर्ष) जांजगीर-चांपा जिले के कोसा गांव का रहने वाला था और मजदूरी का कार्य करता था। उसका उसी गांव की एक महिला संतोषी सिंह क्षत्रिय के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। संतोषी शादीशुदा थी, इसके बावजूद उसकी और अमित की लगातार बातचीत होती रहती थी। संतोषी अक्सर अपने पति से विवाद होने के बाद अपने मायके आ जाया करती थी। इसी दौरान 27 जून को अमित अचानक रहस्यमय तरीके से लापता हो गया और अगले दो दिनों बाद 29 जून को गांव की ही एक बाड़ी में उसका शव बरामद किया गया, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

तकनीकी जाँच और ट्रैकर डॉग की भूमिका

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी जांच का सहारा लिया। पुलिस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए 200 से अधिक मोबाइल टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), आईपीडीआर, जीपीएस, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक तकनीक का गहन विश्लेषण किया। इसके साथ ही, इस हाई-प्रोफाइल मामले में आधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं जैसे ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की मदद भी ली गई। जांच को आगे बढ़ाते हुए बिलासपुर से विशेष रूप से मंगाई गई ट्रैकर डॉग 'विमला' ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाए। ट्रैकर डॉग सीधे आरोपियों के घर के पास पहुंचा, वहां घर के दो चक्कर लगाए और अंत में मेन गेट के सामने जाकर बैठ गया। इसके बाद पुलिस ने घर की दीवार की बारीकी से जांच की, जहाँ खून के धब्बे मिले। फॉरेंसिक टीम द्वारा इन खून के नमूनों की जांच करने पर उनमें इंसानी खून होने की पुष्टि हो गई।

हत्या की रात का पूरा घटनाक्रम

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि घटना की रात संतोषी अपने मायके में ही मौजूद थी। 27-28 अगस्त (घटना की मूल रात) की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे तक अमित और संतोषी ने फोन पर लंबी बातचीत की थी। इसके बाद रात करीब 2:30 बजे अमित चुपचाप संतोषी से मिलने उसके घर के पिछले हिस्से में पहुंच गया। संयोगवश उसी समय संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम समाप्त करके अपने घर वापस लौटा था। घर के पीछे कुछ आहट और आवाज सुनकर जब वह वहां पहुंचा, तो उसने अपनी बहन को अमित के साथ रंगे हाथों देख लिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखा विवाद शुरू हो गया और मारपीट के दौरान अमित का सिर पीछे की दीवार से जा टकराया, जिससे दीवार पर खून के निशान भी अंकित हो गए।

फावड़े से हमला और शव को ठिकाने लगाना

जब अमित अपनी जान बचाने के लिए दीवार फांदकर भागने की कोशिश करने लगा, तभी गुस्से में अंधे हो चुके बजरंग सिंह ने पास ही रखे एक फावड़े से उसके सिर और छाती पर जोरदार वार कर दिया। गंभीर चोटें लगने के कारण अमित की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हत्या को अंजाम देने के बाद बजरंग ने अमित के शव को घर के पीछे स्थित बाड़ी में झाड़ियों के नीचे छिपा दिया। उस रात संयोगवश गांव में चोरी की सूचना पर डायल-112 की पुलिस टीम भी गश्त पर मौजूद थी और ग्रामीणों के जागे होने के कारण आरोपी शव को तुरंत किसी अन्य स्थान पर नहीं ले जा सके।

अगले दिन जब बजरंग का बड़ा भाई पप्पू सिंह गांव लौटा, तो उसे पूरी घटना की जानकारी दी गई। इसके बाद दोनों भाइयों ने मिलकर नाटक किया और अमित के परिजनों के साथ थाने पहुंचकर उसकी गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने में भी शामिल हो गए। हालांकि, पुलिस की कड़ी पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आगे आरोपियों के झूठ का पर्दाफाश हो गया और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त फावड़ा और शव को दूसरी जगह ले जाने में उपयोग की गई लोहे की छोटी सीढ़ी भी सफलतापूर्वक बरामद कर ली है।